बूंदी (08/04/2026) Admin
शोक की घड़ी में भी पुण्य कार्य को प्राथमिकता देने वाले परिवार ने एक मिसाल कायम की। देवपुरा बूंदी निवासी 66 वर्षीय राजेंद्र प्रसाद शर्मा का मंगलवार को आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन के बाद बेटी मनीषा और दामाद सतीश ने पिता के देहदान के संकल्प को पूरा करवाया।पांच दिन पूर्व ही राजेंद्र प्रसाद ने स्वेच्छा से देहदान की इच्छा जताई थी, जो शाइन इंडिया फाउंडेशन कोटा के माध्यम से दर्ज हुई।
सरल, सादगीपूर्ण और धार्मिक प्रवृत्ति के इस मिलनसार व्यक्ति के परिवार ने संस्था से संपर्क कर नेत्रदान व पूर्ण देहदान की प्रक्रिया पूरी कराई। बुधवार को बूंदी मेडिकल कॉलेज में उनकी देह चिकित्सकों को सुपुर्द कर दी गई, जहां मेडिकल छात्रों के प्रैक्टिकल्स के लिए इसका उपयोग होगा।शाइन इंडिया फाउंडेशन के माध्यम से बूंदी मेडिकल कॉलेज को चौथा देहदान है। प्रक्रिया के दौरान एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. विजय नायक, अन्य चिकित्सक, संस्था के संस्थापक डॉ. कुलवंत गौड़, ज्योति मित्र और इदरीस बोहरा मौजूद रहे।
डॉ. विजय नायक ने कहा, “देहदान अत्यंत पुण्य कार्य है। इससे छात्रों को वास्तविक शारीरिक संरचना का अध्ययन करने का अवसर मिलेगा। हम इस परिवार के प्रति कृतज्ञ हैं। यह समाज के प्रति उनका समर्पण दर्शाता है।”कोटा के नेत्रदान जागरूकता अभियान के बाद अब देहदान के प्रति भी जागरूकता बढ़ रही है। ऐसे कदम क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं और अन्य परिवारों को प्रेरित कर रहे हैं।प्रोफेसर ने बताया कि एमबालमिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा मृतक देह को सालों तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
इस संस्था के द्वारा अभी तक बूंदी मेडिकल कॉलेज मे चार देहदान करवाई जा चुके हैं, इसके साथ अभी तक कुल 8 देह मेडिकल कॉलेज में हो चुके हैं जो चिकित्सा से जुड़े छात्र-छात्राओं के लिए मिल का पत्थर साबित हो रहे हैं।
दिवंगत शर्मा की बेटी मनीषा शर्मा व दामाद सतीश शर्मा ने बताया किपिताजी की अंतिम इच्छा यही थी कि दिवंगत होने के बाद उनके शरीर को मेडिकल कॉलेज को देहदान के रूप में दिया जाए। ताकि मेडिकल कॉलेज के भावी डॉक्टरों की पढ़ाई व शोध के काम में आ सकें। उनके देहांत के बाद पिताजी की इच्छा के अनुरूप उनकी देह को बूंदी मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों को सुपुर्द कर दिया गया
बूंदी मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. विजय नायक
