Sagar News: सागर की यामिनी मौर्य ने जूडो में 35 से अधिक गोल्ड मेडल जीतकर मध्यप्रदेश और देश का नाम रोशन किया है. विक्रम और एकलव्य जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित यामिनी ने घुटनों की चोट और ऑपरेशन के बावजूद हार नहीं मानी.
सागर. 9 साल की एक लड़की ने जब जूडो खेलना शुरू किया, तो उसके माता-पिता को रिश्तेदार ताने मारते थे, लेकिन उन रिश्तेदार को इस बेटी ने 3 महीने बाद ही स्टेट चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर जवाब दे दिया, और इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. अब तक वह 35 से अधिक गोल्ड मेडल जीत चुकी है. मध्य प्रदेश में सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार एकलव्य और विक्रम अवार्ड से सरकार उसे सम्मानित कर चुकी है. इतना ही नहीं खेल के दौरान इसके दोनों घुटने भी टूटे ऑपरेशन हुआ लेकिन खेलने नहीं छोड़ा और अब एशियन गेम ओलंपिक की तैयारी में जुटी हुई है ताकि वह इंडिया के लिए मेडल ला सके. यह कहानी सागर की जूडो खिलाड़ी यामिनी मौर्य की है, जो पिछले 17 साल से इस विधा में सागर और मध्य प्रदेश का नाम रोशन कर रही है. इतना ही नहीं यह मध्य प्रदेश की पहली ऐसी जूडो खिलाड़ी है, जिन्हें इस विधा में विक्रम अवार्ड से सम्मानित किया गया है.
यामिनी मौर्य बताती है कि जब वह पुरानी सैलरी स्कूल में कक्षा चौथी में पढ़ती थी. उसे समय दीपक सर सेल्फ डिफेंस सीखने के लिए आए थे. उन्होंने वहां कुछ एक्टिविटी भी कराई थी, जो मुझे काफी पसंद आई और फिर मेरी इसमें रुचि बढ़ गई. पिताजी से बात की तो उन लोगों ने भी सीखने के लिए हां कह दिया फिर दीपक कुमार की अकादमी को ज्वाइन किया. 3 महीने में ही जूनियर स्टेट चैंपियनशिप में हिस्सा लिया, जिसमें गोल्ड मेडल हासिल किया और फिर नेशनल के लिए सलेक्शन हुआ था. तीन बार तो नेशनल में मेडल नहीं आ पाए, लेकिन इसके बाद हर साल गोल्ड मेडल ही जीते. अब तक स्टेट और नेशनल के मिलाकर 35 से अधिक गोल्ड मेडल हो गए हैं. इंटर नेशनल गेम में भी मेडल जीते हैं. यामिनी अब तक 15 देश में अलग-अलग चैंपियनशिप में हिस्सा ले चुकी हैं. अभी नवंबर में फिर ऑस्ट्रेलिया जाना है.
साल 2017 में यामिनी का एक घटना टूट गया था ऑपरेशन की वजह से उनके खेल में 1 साल का गैप आ गया था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और जब गेम में वापसी की, तो गोल्ड मेडल से ही जीत हासिल की. इसी तरह कुछ महीने पहले दूसरे घुटने का भी ऑपरेशन हुआ था, जहां 3 महीने रेस्ट के बाद उन्होंने दोबारा खेलना शुरू किया और नेशनल में गोल्ड जीत कर आई है. यामिनी रहती है कि खेल में चोट तो लगते ही है. यह खेल का हिस्सा होती है, लेकिन हमें मन से घायल नहीं होना चाहिए मन को मजबूत रखना चाहिए, तो आप अपने लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं.
हाल ही में 29 सितंबर से 2 अक्टूबर तक दिल्ली में नेशनल सीनियर रैंकिंग चैंपियनशिप हुई थी इसमें भी यामिनी ने गोल्ड मेडल जीता है. पिछले कुछ समय से कर्नाटक के बेल्लारी में प्रैक्टिस कर ओलंपिक और एशियाई गेमों की तैयारी कर रही हैं. यामिनी के पिता हरि ओम मौर्य किसान हैं जिनकी तीन बेटियां और एक लड़का है. हरिओम मोर्य बताते हैं कि मेरी बेटी आज इस मुकाम पर पहुंच गई है, तो बहुत अच्छा लग रहा है और उस पर गर्व हो रहा है.
